कृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग में झमकर झूमे श्रद्धालु

0
photo_6235480357407407187_y

श्याेपुर 17.02.2024
कृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग में झमकर झूमे श्रद्धालु
ब्यूरोचीफ, नबी अहमद कुरैशी, श्योपुर मध्यप्रदेश
शहर के पुल दरवाजा के पास स्थित मालियों के मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन कथा वाचक आचार्य राहुल पाराशर ने शनिवार को कृष्ण रुकमणी विवाह एवं सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाय गया। कृष्ण-रुकमणी विवाह में श्रद्धालु झमकर झूमे।
कथा वाचक राहल पाराशर ने कहा कि, प्रभु की कृपा के लिए भक्ति की आवश्यकता है। इस दौरान कृष्ण-रुकमणी की सजीव झांकी सजाई गई तथा संगीतमय भजनों पर महिला श्रद्धालु मंत्र मुग्ध होकर जमकर झूमी। उन्होंने बताया कि ग्वाल कृष्ण ने अपने मामा का नहीं बल्कि उसके अहंकार का वध किया। द्वापर युग में जब कंस का अत्याचार बढ़ाए तब भगवान विष्णु ने मनुष्य रूप में श्रीकृष्ण का जन्म लेकर बड़े-बड़े राक्षसों का वध करने के बाद अंत में पापी कंस का वध कर लोगों को उसके अत्याचारों से छुटकारा दिलाया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा नरेश के रूप में विराजमान होने के साथ देवी रूकमणी से धूमधाम से विवाह किया। मंच पर जैसे ही श्रीकृष्ण-रूकमणी का प्रार्दूभाव हुआ। श्रीहरि के जयघोष से पूरा पांडाल गूंज उठा। कथा वाचक द्वारा उद्घोषित मंत्रोचार के बीच जैसे ही विवाह का कार्य संपन्नााा हुआ तो श्रद्धालुओं की भीड़ ने पुष्प वर्षा की। पंडाल में सारा जनमानस भाव विभोर होकर झूम उठा। सुदामा चरित्र कथा का वर्णन करते हुए कथा वाचक कहा कि, कृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता आज कहां है। यही कारण है कि आज भी सच्ची मित्रता के लिए कृष्ण-सुदामा की मित्रता का उदाहरण दिया जाता है। द्वारपाल के मुख से सुदामा सुनते ही द्वारिकाधीश नंगे पांव मित्र की अगवानी करने पहुंच गए। लोग समझ नहीं पाए कि आखिर सुदामा में क्या खासियत है कि, भगवान खुद ही उनके स्वागत में दौड़ पड़े। श्रीकृष्ण ने स्वयं सिंहासन पर बैठाकर सुदामा के पांव पखारे। कृष्ण-सुदामा चरित्र प्रसंग पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंच रहे हैं। सुदामा चरित्र का बखान करते हुए कहा कि संसार में मित्रता भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होनी चाहिए। आधुनिक युग में स्वार्थ के लिए लोग एक दूसरे के साथ मित्रता करते हैं और काम निकल जाने पर लोग एक दूसरे को भूल जाते हैं। जीवन में प्रत्येक प्राणी को परमात्मा से एक रिश्ता जरूर बनाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *