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56 मदरसों में योजना बंद 24 मदरसों पर विभाग मेहरबान

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श्याेपुर 09,03 2024
ब्यूरोचीफ, श्योपुर मध्यप्रदेश
56 मदरसों में योजनाओं का लाभ बंद, 24 मदरसों पर विभाग मेहरवान क्यों
– 24 मदरसों में कई धरातल पर नहीं और ना ही कोई मान्यता फिर भी मिल रहा है योजनाओं का लाभ।
ब्यूरोचीफ, श्योपुर मध्यप्रदेश
जिले मे मदरसा संचालन का खेल इन दिनों जोरो पर चल रहा है. जिले मे संचालित 80 मदरसों मे से केवल 24 मदरसों को शासन की योजनाओं का लाभ दिया जारहा है। जहा पूर्व से 2025 तक की मान्यता प्राप्त मदरसों को शासन की योजनाओं का लाभ दिया जाना जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा फ़रवरी 2024 से बंद कर दिया गया। जिसको लेकर इन दिनों चर्चाओ का बाजार गर्म बना हुआ है। इतना हि नही 80 मदरसों मे से मात्र 24 मदरसों को शासन की योजनाओं का लाभ दिये जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी पर भृष्टाचार के आरोप भी लगाए जार हे है।
जबकि पूर्व मे कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी जिला श्योपुर द्वारा जारी पत्र क्रमांक 6149/ 2023 दिनांक 26 /10 /2023 के माध्यम से निवेदन किया गया था की कार्यालय कलेक्टर जिला श्योपुर के पत्र क्रमांक 2811 – 12 श्योपुर दिनांक 24 मार्च 2023 से भी जिला अंतर्गत संचालित पाए गए 24 मदरसा की सूची भी आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल को प्रसेषित की गई थी किंतु शेष के संबंध में आज दिनांक तक किसी प्रकार की कार्यवाही का पत्र प्राप्त नहीं हुआ है मदरसा संचालको द्वारा भी मदरसा को संचालित किए जाने के संबंध में पत्र इस कार्यालय वरिष्ठ कार्यालय में प्रस्तुत किए जा रहेहैं तथा समग्र शिक्षा पोर्टल पर मदरसा मैं अध्यनरत छात्र-छात्राओं की मैपिंग में अपडेशन का कार्य भी कराया जा रहा है यहां विशेष रूप से उल्लेखनीय होगा कि शैक्षणिक सत्र 2023- 24 प्रारंभ हुए लगभग 6 माह से अधिक का समय व्यतीत हो चुका है तथा अर्धवार्षिक परीक्षा का आयोजन माह नवंबर 2023 में किया जाना है क्योंकि उक्त परीक्षाओं का आयोजन जिला अंतर्गत संचालित शासकीय शासकीय शिक्षण संस्थान मदरसा में आयोजित होगी ऐसी स्थिति में सूचीबद्ध संचालित 56 मदरसा में अध्यनरत छात्र-छात्रा के परीक्षा से वंचित रहने की स्थिति निर्मित होगी आयुक्त लोक शिक्षण भोपाल में मदरसा बोर्ड भोपाल में ततसंबंधी प्रक्रिया प्रचलित होने से मदरसा में अध्यनरत छात्रों के हित को दृष्टिगत रखते हुए परीक्षा में सम्मिलित कराया जाना तथा मदरसा को पूर्व की भांति प्राप्त होने वाली सभी सुविधाओं को वरिष्ठ कार्यालय से मार्गदर्शन निर्देश की
अपेक्षा तक निरंतर रखे जाने हेतु प्रस्ताव आवश्यक कार्यवाही हेतु सादर प्रेषित है।
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समझ से परे जिम्मेदारों की जिम्मेदारी
उक्त पत्र मे जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा किये गये निवेदन के बाद 56 मदरसों को दिया जारहा शासकीय योजनाओं का लाभ जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा परीक्षा से पूर्व हि बंद कर देना समझ से परे तो बन हि रहा है साथ हि आर्थिक भ्रष्टाचार की आशंका भी व्यक्त करता हुआ नजर आता है शायद यही कारण है जहा 80 मदरसों मे से मात्र 24 मदरसों को शासकीय योजनाओं का लाभ यथास्तिथि पर रखा गया है और सेवा नही करने वाले 56 मदरसों को शासन की योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया गया है।
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असंचालित की सूची में फिर भी लाभ बंद
मदरसा के भौतिक सत्यापन दल के शिक्षक सी एम माहौर जो की वर्तमान मे सेवा निवर्त हो गये उनके द्वारा निरीक्षण के दौरान भौतिक सत्यापन कर निरीक्षण पत्र पर टिप डाली गयी की मदरसा संचालित मिला नियमनुसार अनुदान प्रदाय करने की अनुसंशा की जाति है जिस पर उनके द्वारा स्टाम्प लगाकर हस्ताक्षर मोबा न. अन्कित् करने के साथ हि मदरसा प्रधांध्यापक के हस्ताक्षर व स्टांप अंकित है ऐसे मे क्या माना जाये की 56 मदरसा पर भी अनुदान अनुसंशा की गयी होगी फिर तो दर्ज, निरीक्षण में संचालित, चित क्या? जिले में संचालित मदरसा संचालको द्वारा एक दूसरे की शिकायत की जारही है शिकायतों के चलते 56 मदरसों को शासकीय योजनाओं के लाभ को बंद किया गया है कोई भौतिक परीक्षण नही किया गया शिकायतों पर योजनाओं का लाभ देना बंद कर दिया गया है।
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40 बार मदरसा संचालकों ने की शिकायत नहीं हुई कार्रवाई
मदरसा संचालको ने 40 बार आवेदन देकर शिकायत की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मदरसा संचालकों का आरोप है कि, जिस शिक्षक को मदरसों की जांच दी गई है खुद उसकी नियुक्ति फर्जी है, क्योंकि उसने तीन संतान वाले दस्तावेज छिपाकर नौकरी हतियाई है। खास बात ये भी है कि भोपाल के एक ही आदेश और हाई कोर्ट के नोटिस से बच्चों को मिलने वाली सभी सुविधा चालू की फिर उसी आदेश से सुविधाएं बंद की क्योंकि आधी ही मांग पूरी की।

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