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MANIPUR मणिपुर के कांगपोकपी जिले में बम ब्लास्ट

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MANIPUR मणिपुर के कांगपोकपी जिले में बम ब्लास्ट

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MANIPUR पूर्व विधायक की पत्नी की मौत, टेंग्नौपाल में गोलीबारी में एक उग्रवादी और 4 वॉलंटियर्स मारे गए

MANIPUR मणिपुर के कांगपोकपी जिले में शनिवार (10 अगस्त) को हुए बम ब्लास्ट में एक पूर्व विधायक की पत्नी की मौत हो गई।

पुलिस ने बताया घटना सैखुल के पूर्व विधायक यमथोंग हाओकिप के घर के पास हुई।

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हादसे में घायल पूर्व विधायक की पत्नी सापम चारूबाला की अस्पताल में मौत हो गई। बम किसने लगाया, इस बात का पता नहीं चल सका है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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वहीं, 9 अगस्त को टेंग्नौपाल जिले के मोलनोम इलाके में फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि फायरिंग गांव के वॉलंटियर्स और उग्रवादी संगठन यूनाइटेड कुकी लिबरेशन फ्रंट (UKLF) के सदस्यों के बीच हुई थी। इसमें एक उग्रवादी और 3 वॉलंटियर्स मारे गए।

घटना से गुस्साए लोगों ने UKLF के अध्यक्ष एसएस हाओकिप के घर में आग लगा दी। हालांकि अब स्थिति नियंत्रण में है। मामले में अब तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।

पूर्व विधायक की पत्नी चारूबाला मैतेई समुदाय से आती हैं, जबकि उनके पति कुकी हैं।

जिरिबाम में शांति समझौते के 24 घंटे बाद ही हिंसा
मणिपुर के जिरिबाम के लालपानी गांव में 2 अगस्त की रात हथियारबंद लोगों ने कई राउंड फायरिंग की। यह घटना जिरिबाम में शांति बहाल करने के लिए हुए समझौते के 24 घंटे के भीतर हुई। हमलावरों ने एक घर में आग लगा दी। हालांकि, वहां कोई नहीं रहता था।

अधिकारियों ने बताया कि लालपानी में मैतेई लोगों के घर हैं। यहां के अधिकांश लोगों ने जिले में हिंसा भड़कने के बाद घर छोड़ दिया था। उपद्रवियों ने यहां सुरक्षा-व्यवस्था में ढील का फायदा उठाकर हमला किया। हमलावरों की अभी तक पहचान नहीं हुई है।

घटना के बाद सुरक्षाबलों को इलाके में भेजा गया। मैतेई और कुकी समुदायों ने गुरुवार (1 अगस्त) को असम के कछार से सटे CRPF ग्रुप सेंटर में एक बैठक के बाद शांति समझौते पर साइन किए थे।

दोनों समुदायों ने जिले में स्थिति सामान्य करने, आगजनी और गोलीबारी की घटनाओं को रोकने की बात कही थी। दोनों पक्षों ने सुरक्षाबलों को भी पूरा साथ देने का आश्वासन दिया था।

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मणिपुर CM बोले- 5 साल में 10 हजार अवैध प्रवासी आए
मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने शुक्रवार 9 अगस्त को विधानसभा में कहा कि पिछले 5 साल में राज्य में कुल 10,675 घुसपैठिए आए। ये घुसपैठिए म्यांमार, बांग्लादेश, नॉर्वे, चीन और नेपाल से आए।

बीरेन सिंह ने ये भी बताया कि इन 10,675 घुसपैठियों में से 85 पिछले 5 साल में वापस भेज दिए गए। 143 घुसपैठिए डिटेंशन सेंटर में हैं। इन लोगों के मेंटेनेंस पर 85 लाख से ज्यादा खर्च हो रहा है। अवैध अप्रवासियों को रोकने के लिए सरकार वैरिफिकेशन प्रोग्राम चला रही है।

CM ने कहा कि राज्य में हिंसा भड़कने से पहले ही म्यांमार से 2,480 अवैध अप्रवासी आ गए थे। इन्हें रोकने के लिए केंद्र सरकार ने भारत-म्यांमार बॉर्डर पर फेंसिंग की घोषणा की है। फेंसिंग का काम पहले ही शुरू हो चुका है। पिलर 79 से 81 के बीच 9 किलोमीटर की बॉर्डर फेंसिंग हो भी चुकी है।

जिला पुलिस अप्रवासियों को रोकने के लिए 24 घंटे काम कर रही है। बॉर्डर एरिया में 6 पुलिस स्टेशन और 34 पुलिस चौकियां स्थापित करने की प्रक्रिया भी चल रही है। इसके अलावा बॉर्डर के पास वाले 5 जिलों में सिविल और पुलिस नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।

CM बोले- सरकार शांति स्थापित करने के लिए काम कर रही
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने गुरुवार (1 अगस्त) को विधानसभा में कहा था कि सरकार शांति स्थापित करने के लिए काम कर रही है। इसे लेकर असम के सिलचर में कई बैठकें हो चुकी हैं। जल्द ही इसे लेकर बड़ा ऐलान भी करेंगे।

बीरेन सिंह ने विधानसभा में कहा कि राज्य में पिछले साल मई से शुरू हुई हिंसा में अब तक 226 लोग मारे जा चुके हैं। वहीं, 39 लापता हैं। 11,133 घरों में आग लगाई गई, जिसमें से 4,569 घर पूरी तरह खत्म हो चुके हैं।

हिंसा को लेकर कुल 11,892 केस दर्ज हुए हैं। 59,414 विस्थापित लोग राहत शिविरों में हैं। 5,554 किसानों की जमीन बर्बाद हो गई है। विस्थापितों को 302 राहत कैंप में स्थापित कियाजून तक हिंसा से अछूता था जिरिबाम
3 मई 2023 से मणिपुर की इंफाल घाटी में रहने वाले मैतेई और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी के बीच जातीय संघर्ष में 226 लोगों की मौत हो गई है। मैतेई, मुस्लिम, नगा, कुकी और गैर-मणिपुरी समेत विविध जातीय संरचना वाला जिरिबाम जून 2024 तक जातीय संघर्ष और हिंसा से अछूता रहा था।

मणिपुर के जिरिबाम में सेंट्रल फोर्सेज पर हमला हुआ। CRPF की एक गाड़ी भी हमले में क्षतिग्रस्त हो गई।

जिरिबाम में CRPF और पुलिस टीम के काफिले पर कुकी उग्रवादियों ने 14 जुलाई को हमला कर दिया। इसमें CRPF का एक जवान शहीद हो गया। पुलिस का एक अधिकारी भी घायल हो गया। पुलिस ने बताया कि मोंगबुंग में कुकी उग्रवादियों ने पहाड़ी इलाके से गोलीबारी की। गोली CRPF जवान अजय कुमार झा के सिर पर लगी

CM का सुरक्षा दस्ता हिंसा प्रभावित जिरिबाम में सीएम की सभा से पहले तैयारियों का जायजा लेने जा रहा था।

जिरिबाम में उग्रवादियों ने मणिपुर CM बीरेन सिंह के सुरक्षा दस्ते पर 10 जून को हमला किया। यह सुरक्षा दस्ता सीएम की सभा से पहले तैयारियों का जायजा लेने जा रहा था। इस गोलीबारी में ड्राइवर समेत दो सुरक्षाकर्मी घायल हुए। हमले के वक्त मुख्यमंत्री काफिले में नहीं थे।

पुलिस का कहना है कि हमलावर 3-4 नावों पर सवार हो बराक नदी के रास्ते घुसे थे।

जिरिबाम में 8 जून को संदिग्ध उग्रवादियों ने दो पुलिस चौकियों, एक फॉरेस्ट ऑफिस और 70 घरों में आग लगा दी। पुलिस का कहना है कि हमलावर 3-4 नावों पर सवार होकर बराक नदी के रास्ते घुसे थे। इधर, आग लगाने की घटना जीरी मुख और छोटो बेकरा की पुलिस चौकियों और गोआखाल वन बीट ऑफिस में हुई। इस घटना के कुछ घंटों बाद एसपी का तबादला कर दिया गया।

जिरिबाम के गांवों में आगजनी से भारी नुकसान हुआ है।

जिरिबाम में 6 जून को मैतेई बुजुर्ग की हत्या के विरोध में इलाके में हिंसा भड़क गई थी। गुस्साए गांववालों ने जिरिबाम पुलिस स्टेशन के सामने विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव से पहले उनसे जो लाइसेंस वाले हथियार लिए गए थे, वे उन्हें लौटा दिए जाएं। हिंसा के चलते 200 से ज्यादा मैतेई लोगों को घरों से निकाल कर सुरक्षित जगहों पर भेजा गया। कुछ लोग जंगल में भी छिपे थे

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मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।

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कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।

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मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।

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नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा।

सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।

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