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राजस्थान में 50 साल में पहली बार ऐसी तबाही

special report

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राजस्थान में 50 साल में पहली बार ऐसी तबाही

ग्रामीण बोले- 8-9 फीट तक पानी भरा;

घर में रखा खाद, बीज, गेहूं, सोयाबीन, सरसों सब बर्बाद

सुबह नींद खुली तो कमरे में 8 से 9 फीट तक पानी भरा था। घर में सामान तैर रहे थे। अनाज से लेकर सारा घरेलू सामान पानी में समा गया। अब तो दाने-दाने के मोहताज हो गए हैं।

सारा अनाज भीग कर खराब हो गया।
बूंदी जिले में 22 और 23 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश के बाद हालात बिगड़ गए हैं। बूंदी के नैनवां, केशोरायपाटन, कापरेन, लाखेरी के ग्रामीणों की पीड़ा इस तरह जुबान पर आ रही है। गांवों में बाढ़ के बाद की तबाही के निशान अब भी बाकी हैं। दलदल-कीचड़ के बीच अपने सामान समेटते लोग नजर आ रहे हैं।

पंचायत भवन से लेकर हॉस्पिटल तक डूब गया था। अचानक आई बाढ़ ने संभलने का मौका नहीं दिया। बड़ी मुश्किल से ग्रामीणों ने अपनी जान बचाई।देवरिया में पानी में बहे अनाज को छलनी की सहायता से कुछ इस तरह इकट्‌ठा करने का प्रयास किया जा रहा है।
23 अगस्त की सुबह गांव में अफरा-तफरी मची
डोकून निवासी दिनेश नागर ने बताया- 23 अगस्त की सुबह डोकून नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही थी। पंचायत भवन डूब गया था। अचानक पानी आने से गांव में अफरा-तफरी मच गई थी।

लोग अपनी जान बचाने और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में जुट गए। इस दौरान अपना जरूरी सामान भी नहीं बचा पाए। अनाज और अन्य सामान भीग गया। आज भी गांव में कई घरों में पानी भरा हुआ है। रास्तों में कीचड़ जमा है। लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बूंदी जिले के नैनवां के देई गांव में बारिश के दौरान कई मकान ढह गए थे।
नैनवां के पाई बालापुरा बांध से तबाही
नैनवां के पाई बालापुरा बांध का पानी तेज गति से भजनेरी डोकून की तरफ आया। पूरे गांव में ‘जलप्रलय’ की स्थिति थी। लाइट व मोबाइल नेटवर्क बंद हो गया। पानी घरों में घुस गया। घरों में रखा खाद, बीज, गेहूं, सोयाबीन, सरसों सब पानी के साथ बह गए। बाड़े में खड़े जानवरों पर भी मुसीबत आई।

ग्रामीण परिवार के सदस्यों के साथ मवेशियों को बचाने में लगे। पानी की आवक से मकानों की नींव तक धंस गई। कच्चे और पक्के मकान धराशायी हो गए। कई मकानों में दरारें आ गईं।खेतों में खड़ी फसल और घरों में रखा अनाज खराब
ग्रामीणों ने बताया कि कई साल बाद बाढ़ की ऐसी विभीषिका से सामना हुआ। डोकून के ग्रामीणों का कहना है कि घरों में रखा गेहूं, चना, सोयाबीन, सरसों खराब हो गए हैं। मकान व अन्य सामानों का नुकसान अलग है। साथ ही खेतों में खड़ी फसल भी खराब हो गई।

गांव में अब भी तबाही के निशान
भास्कर टीम डोकून गांव पहुंची तो वहां चौराहे पर खड़े लोग इकट्ठे हो गए और बाढ़ से मिली पीड़ा बयां करने लगे। गांव से थोड़ी दूर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली नदी में बह गई थी। वह पलटी हुई अब भी वहीं पड़ी है।

पंचायत भवन पहुंचे तो वहां तीन दिन बाद भी बाढ़ के पानी के साथ कीचड़ आपदा की गवाही दे रहा था। पंचायत सहायक सोनू वर्मा ने बताया कि सब कुछ बर्बाद हो गया। पंचायत में कुछ भी नहीं बचा है।

पूरी पंचायत पानी में डूब गई। कंप्यूटर, पंचायत रिकॉर्ड सहित सरकारी दस्तावेजों के ऊपर कीचड़ जमा हो गया था। पंचायत भवन में 8 से 9 फीट तक पानी भर गया था।

पास में कृषि सेवा केंद्र की पर्यवेक्षक रीना मीणा ने बताया- सब कुछ डूब गया। कोई भी दस्तावेज नहीं बचे हैं। आंगनबाड़ी, हॉस्पिटल की भी स्थिति कुछ ऐसी ही थी।

थोड़ा आगे चलने के बाद गांव की गलियों मे पहुंचे तो महिलाएं टेबल फैन लगाकर अनाज सुखाती मिलीं। भीग जाने के कारण सोयाबीन, चना, सरसों खराब हो रहे हैं।

कुछ लोगों ने अनाज को खुले में सूखने के लिए फैला रखा था। महिलाओं ने कहा- क्या करें पूरा माल खराब हो गया, जो बच गया उनको सुखा रहे हैं। अब यह माल बाजार में कौड़ियों के भाव में भी नहीं बिकने वाले।

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