रोहतक का ASI सुसाइड- फिंगर वेबिंग जांच होगी
रोहतक में साइबर सेल के ASI संदीप/संदीप कुमार
लाठर की मौत को पुलिस ने आत्महत्या बताया है।
घटनास्थल से सुसाइड नोट और वीडियो भी मिले हैं
और अब जांच के कई हिस्से चल रहे हैं —
एक SIT बनाई गई है और फॉरेंसिक/बालिस्टिक परीक्षण करवाए जा रहे हैं। अनेक समाचार रिपोर्टों के मुताबिक पोस्टमार्टम में सिर की चोट की जांच की गई, कुछ एक्स-रे हुए पर गोली का हिस्सा शरीर में तुरंत नहीं मिला, इसलिए घटनास्थल और सैंपल लैब भेजे जा रहे हैं।
“फिंगर वेबिंग” का मतलब और क्यों जांच रहे हैं
फिंगर-वेबिंग (finger webbing) से यहाँ मतलब है — ऊँगलियों के बीच की त्वचा पर ऐसा कुछ जमा या बदलना कि वह निकट-रेंज (बहुत पास से) फायरिंग का संकेत दे। निकट-रेंज शॉट में बारूद/गैस/ऊष्मा/सोपलिकेशन के कारण त्वचा पर बदलाव या “फ्यूज़” जैसा कुछ बन सकता है; इसलिए त्वचा के उन हिस्सों के नमूनों को वैज्ञानिक लैब में भेजकर यह तय किया जा रहा है कि यह बदलाव गोली चलने से हुए हैं या किसी और कारण (जैसे आग, रसायन आदि) से। यह कदम अधिकारी/पीजीआई ने भी बताया है।
“गोली कितनी दूर से चली” — फॉरेंसिक तरीके जिनसे यह पता लगता है
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गनशॉट रेजिड्यू (GSR) और सॉट टिकाऊपन — निकट-रेंज शॉट पर त्वचा/कपड़े पर बारूद के कण और स्याही (soot/blackening) पड़ते हैं; इनका पैटर्न दूरी का संकेत देता है। GSR-टेस्ट से यह भी पता चलता है कि किस हाथ से या किस दूरी से गोली चली।
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स्टिप्लिंग/टैटूइंग (burn/abrasion pattern) — मध्यम निकटता पर त्वचा पर छोटे-छोटे जलने/छर्रों जैसे निशान बनते हैं; ये दूरी का संकेत देते हैं।
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वाउंड ट्रैक और एंट्रोपोलॉजिकल-एक्स-रे — गोली का मार्ग और घावों के आसपास की क्षति देखकर डॉक्टर दूरी और शॉट-ऐंगल का अंदाजा लगाते हैं; कई बार शरीर के अंदर की एक्स-रे/CT से भी गोली के हिस्से मिलते हैं। रिपोर्टों में बताया गया कि सिर की कई X-ray हुईं पर गोली का कोर तुरंत नहीं मिला — इसलिए घटनास्थल पर मेटल-डिटेक्टर/कठोर तलाशी और लैब परीक्षण जरूरी हुए।
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बालिस्टिक व फोरेंसिक शॉट-रिपोर्ट — लैब में भेजे गए नमूनों (त्वचा, कपड़ा, GSR swabs, खोया-पाया मलबा) की सूक्ष्मदर्शी व रसायनिक जांच से दूरी के बारे में वैज्ञानिक निष्कर्ष दिए जाते हैं।
अभी क्या चल रहा है — क्या उम्मीद की जा सकती है
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घटनास्थल और पोस्टमार्टम सैंपल फॉरेंसिक लैब भेजे गए/भेजे जा रहे हैं; रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि शॉट क्लोज-रेंज था या नहीं।
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पुलिस ने SIT बनाई है; FIR और सबूत फिलहाल संवेदनशीलता के चलते सार्वजनिक रूप से पूरी तरह नहीं डाल रहे — इसलिए आधिकारिक विवरण धीरे-धीरे सामने आएंगे।
क्या संकेत निकले तो “पास से गोली” माना जाएगा
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त्वचा/कपड़ों पर स्पष्ट सॉट/स्टिप्लिंग पैटर्न, GSR-कण उच्च स्तर पर, और फिंगर-वेबिंग के इलाज-रहित नमूनों में आगर-जैसी रासायनिक पुष्टि — ये सभी पास-रेंज का समर्थन करेंगे। इसके विपरीत, दूर से गोली चलने पर सॉट या स्टिप्लिंग नहीं मिलते और शरीर पर केवल प्रवेश/निकास घाव के निशान होते हैं।
निचोड़ (takeaway)
आपका हेडलाइन जैसा विषय — “फिंगर वेबिंग जांच होगी; गोली कितनी दूर से चली यह पता लगेगा” — ठीक उसी दिशा में है: फॉरेंसिक लैब-टेस्ट (त्वचा/हाथ/कपड़ा/GSR) और बालिस्टिक रिपोर्ट से वैज्ञानिक तौर पर दूरी का निर्धारण किया जाएगा। फिलहाल कई प्रमुख समाचार एजेंसियों ने यही रिपोर्ट की है कि मामले की संवेदनशीलता के चलते जांच कई पहलुओं से चल रही है और परिणाम आने पर ही निर्णायक बयान दिया जाएगा।

