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छतरपुर और पन्ना से इस वक्त की बड़ी खबर,

special report

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छतरपुर और पन्ना से इस वक्त की बड़ी खबर

जहां Ken–Betwa Link Project को लेकर आदिवासी किसानों का गुस्सा

अब खुलकर सड़कों पर दिखाई दे रहा है।

देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना मानी जाने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना, जिसकी लागत लगभग 44 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है

छतरपुर और पन्ना से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां Ken–Betwa Link Project को लेकर आदिवासी किसानों का गुस्सा अब उफान पर है और यह विरोध अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना मानी जाने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना, जिसकी लागत करीब 44 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है, अब जमीन पर भारी विरोध और विवादों में घिरती नजर आ रही है। पूरा मामला भूमि अधिग्रहण से जुड़ा हुआ है, जहां पन्ना और छतरपुर जिले के हजारों आदिवासी परिवारों की जमीन इस परियोजना के तहत बनने वाले बांध के डूब क्षेत्र में आने वाली है। प्रदर्शन कर रहे आदिवासियों का साफ कहना है कि उन्हें न तो इस परियोजना की पूरी जानकारी दी गई और न ही उनकी ग्राम सभाओं से सही तरीके से सहमति ली गई, जबकि कानून के तहत यह जरूरी प्रक्रिया है। हालात तब और बिगड़ गए जब आंदोलनकारी दिल्ली जाकर अपनी बात रखना चाहते थे लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया, जिसके बाद आक्रोश और बढ़ गया। महिलाओं ने मोर्चा संभालते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके साथ न सिर्फ बदसलूकी की बल्कि उनके खाने-पीने का सामान तक छीन लिया गया, जिसने इस विरोध को और भड़का दिया। इसके बाद हजारों आदिवासी और किसान सीधे Panna National Park के पास स्थित मुख्य बांध निर्माण स्थल पर पहुंच गए और वहीं डेरा डाल दिया, जिसके चलते पिछले दो दिनों से निर्माण कार्य पूरी तरह बंद पड़ा है। आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी बेहद मजबूत है, जो न सिर्फ विरोध का नेतृत्व कर रही हैं बल्कि प्रशासन से सीधा संवाद भी कर रही हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं है बल्कि “जल, जंगल और जमीन” की पहचान और अस्तित्व की लड़ाई है, जिसे वे किसी भी कीमत पर हारने को तैयार नहीं हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता Amit Bhatnagar ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह संघर्ष जारी रहेगा और सरकार की किसी भी दमनकारी नीति से वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना पारदर्शी सर्वे और ग्राम सभा की सहमति के लोगों को उनकी जमीन से बेदखल किया जा रहा है, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। मौके पर जब तहसीलदार इंद्र कुमार गौतम पहुंचे तो उन्हें आदिवासी महिलाओं के भारी विरोध का सामना करना पड़ा और उनसे सीधे सवाल किए गए कि आखिर क्यों लोगों को इस परियोजना की बुनियादी जानकारी तक नहीं दी जा रही और क्यों उनके अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है। फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, लेकिन स्थिति बेहद संवेदनशील है क्योंकि एक तरफ सरकार इस परियोजना को विकास और जल प्रबंधन के लिए जरूरी बता रही है, तो दूसरी तरफ स्थानीय लोग इसे अपने जीवन और आजीविका के लिए खतरा मान रहे हैं। इस पूरे मामले में जय किसान संगठन सहित कई किसान संगठनों का भी समर्थन आंदोलन को मिल रहा है, जिससे यह विरोध और मजबूत होता जा रहा है। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो वे बांध निर्माण का काम पूरी तरह रुकवाने के लिए और बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे। ऐसे में यह सवाल अब बेहद अहम हो गया है कि क्या विकास की इस दौड़ में आदिवासियों के अधिकारों और पर्यावरणीय संतुलन को नजरअंदाज किया जा रहा है या फिर सरकार कोई ऐसा रास्ता निकाल पाएगी जिससे दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सके। फिलहाल पन्ना और छतरपुर से उठी यह आवाज अब राष्ट्रीय स्तर पर गूंजने लगी है और आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

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