जबकि जनता सांस लेने तक को मजबूर है। कई जगहों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सरकार और एजेंसियां असली प्रदूषण डेटा छिपा रही हैं और AQI रिपोर्ट को कम दिखा रही हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी न हो।
दिल्ली में बढ़ते एयर पॉल्यूशन के खिलाफ शनिवार को कई सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने प्रदर्शन किया प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार प्रदूषण पर ठोस कदम नहीं उठा रही
वहीं, पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मांग की कि तुरंत निर्माण कार्यों पर नियंत्रण, वाहनों के उत्सर्जन की सख्त जांच और इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन पर रोक लगाई जाए।
दिल्ली में शुक्रवार को भी AQI कई इलाकों में 450 से ऊपर रहा, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। डॉक्टर्स ने चेतावनी दी है कि ऐसी हवा में कुछ घंटों तक रहना भी फेफड़ों और हृदय पर बुरा असर डाल सकता है। बावजूद इसके, नागरिकों का कहना है कि न कोई पॉलिसी दिखाई दे रही है, न पारदर्शिता। “सरकार डेटा छिपा रही है और जनता मर रही है,” यह नारा आज पूरे प्रदर्शन में गूंजता रहा।
जनपथ और आईटीओ इलाकों में हुए इन प्रदर्शनों के दौरान लोगों ने बैनर और पोस्टर लेकर नारे लगाए — “सांस लेने का हक दो”, “पब्लिक मर रही है, सरकार सो रही है”। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिनमें कुछ प्रमुख पर्यावरण कार्यकर्ता भी शामिल थे।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार “गंभीर” श्रेणी में बना हुआ है, स्कूल बंद करने और निर्माण रोकने जैसे अस्थायी उपाय काफी नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर एक लॉन्ग-टर्म क्लीन एयर पॉलिसी बनाएं जिसमें इंडस्ट्रियल एमिशन, ट्रैफिक कंट्रोल और स्टबल बर्निंग पर सख्त कदम उठाए जाएं।
प्रदर्शन के दौरान एक एक्टिविस्ट ने कहा, “सरकारों को डेटा पारदर्शी करना चाहिए। अगर हम सही आंकड़े नहीं जानेंगे तो समाधान कैसे निकालेंगे?”
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि दिल्ली में AQI लगातार “गंभीर” स्तर पर बना हुआ है, स्कूल बंद करने पड़ रहे हैं, बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है, फिर भी सरकार की प्राथमिकता कहीं और है। कई लोगों ने मांग की कि सरकार तुरंत सख्त एंटी-पॉल्यूशन एक्शन प्लान लागू करे, इंडस्ट्रियल एमिशन और वाहन प्रदूषण पर नियंत्रण लाए, और हवा की क्वालिटी से जुड़ा सटीक डेटा सार्वजनिक करे।
सोशल मीडिया पर भी “#RightToBreathe” और “#DelhiSmogCrisis” जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जिनमें लोग गुस्सा जाहिर कर रहे हैं कि “पब्लिक मर रही है, लेकिन किसी को परवाह नहीं।” कई विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो दिल्ली में अगले कुछ हफ्तों में स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति बन सकती है।
प्रदर्शन में शामिल पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन एयर क्वालिटी डेटा छिपा रहा है और सच्चाई जनता से दूर रखी जा रही है। उनका कहना है कि कई निगरानी केंद्रों के रियल-टाइम डेटा ऑनलाइन पोर्टल से हटाए जा चुके हैं या अपडेट नहीं किए जा रहे।
पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिनमें छात्रों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की बड़ी संख्या शामिल थी। प्रदर्शन स्थल पर हल्का तनाव भी देखा गया, लेकिन बाद में स्थिति नियंत्रण में रही।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार तुरंत ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) को सख्ती से लागू करे, उद्योगों और निर्माण स्थलों की निगरानी बढ़ाई जाए, और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि “दिल्लीवाले धीरे-धीरे दम घुटने से मर रहे हैं, लेकिन सरकार अब भी आंकड़ों की बाज़ी में उलझी है।” 🌫️
फिलहाल पुलिस ने सभी को शांति भंग करने के आरोप में हिरासत में लिया है और जांच जारी है, जबकि सोशल मीडिया पर लोग सरकार की चुप्पी और डेटा छिपाने पर सवाल उठा रहे हैं। 🌫️💨